उस दिन मुझे अपना दादा होना समझ में आया…
जब अपना दादा होना समझ में आया…
महिला दिवस का दिन था। घर में सामान्य-सी हलचल थी, लेकिन मेरे भीतर एक अलग ही शांति थी। तभी कुक्कू मेरे पास आई—आंखों में चमक और मन में एक आग्रह लेकर। उसने कहा कि वह अपनी दादी और मम्मा को पुष्पगुच्छ देना चाहती है। उसकी मासूम जिद में प्रेम था, पर साथ ही एक आदत भी—जो उसने दुनिया से देखी थी।
मैंने उसे गौर से देखा। वह केवल फूल नहीं देना चाहती थी, वह अपनी भावनाओं को सबसे सुंदर तरीके से व्यक्त करना चाहती थी। उसी क्षण मुझे लगा कि यह केवल एक उपहार चुनने का विषय नहीं है, यह एक अवसर है—उसके मन में एक छोटी-सी समझ बोने का।
मैंने उसे बहुत सरल शब्दों में कहा—
“बेटा, ये फूल कुछ ही देर में मुरझा जाएंगे… और फिर इन्हें फेंक दिया जाएगा। क्या अच्छा नहीं होगा कि तुम कुछ ऐसा दो, जिसकी खुशी थोड़ी देर और टिके?”
वह चुप हो गई। उसकी आंखों में सवाल थे, लेकिन विरोध नहीं। मैंने मुस्कुराकर कहा—
“अगर तुम चॉकलेट दोगी, तो उसकी मिठास बाद में भी बनी रहेगी… जैसे तुम्हारा प्यार।”
उसने मेरी बात को सुना… समझा… और बिना किसी बहस के अपने निर्णय को बदल लिया। उस क्षण मुझे लगा कि बच्चे वास्तव में बहुत सहज होते हैं—बस उन्हें सही दिशा देने की जरूरत होती है।
अगले दिन जब वह चॉकलेट लेकर आई और अपने छोटे-छोटे हाथों से दादी और मम्मा को भेंट दी, तो मैं दूर खड़ा उसे देख रहा था। उस दृश्य में केवल एक बच्ची का उपहार नहीं था, बल्कि एक सीख का साकार रूप था।
उस दिन मुझे पहली बार गहराई से एहसास हुआ कि दादा होना केवल लाड़-प्यार देने का नाम नहीं है। यह उस जिम्मेदारी का नाम है, जिसमें हमें बच्चों के मन में ऐसी समझ बोनी होती है जो उन्हें जीवन के हर मोड़ पर संतुलन सिखाए।
मुझे यह भी महसूस हुआ कि हर सीख देना भी एक कला है। यदि हम बच्चों को ऐसी बातें सिखाएं जो उनके भीतर भय, दबाव या निराशा भर दें, तो वह सीख नहीं, बोझ बन जाती है। लेकिन यदि हम उन्हें जीवन को सही परिप्रेक्ष्य में देखने की दृष्टि दें—जहां वे परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल सकें—तो वही सीख उनके लिए शक्ति बन जाती है।
उस दिन मैंने केवल कुक्कू को नहीं समझाया था… मैंने खुद को भी समझा था।
कि सीख देने वाला वही होना चाहिए, जिसका नजरिया व्यापक हो, जो जीवन को सीमाओं में नहीं, संभावनाओं में देखता हो।
और शायद यही दादा होने का सबसे सुंदर एहसास है—
जब आप किसी बच्चे को सिर्फ उपहार देना नहीं, बल्कि जीवन को समझने का तरीका दे पाते हैं।
सूचना स्रोत
राजीव वर्मा
पाठ्य उन्नयन और विस्तार
प्रस्तुति








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