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नियोजित व अनियोजित कल्पनाशीलता को समझें

अनियोजित कल्पनाशीलता से कल निर्मित इमारतें आज खंडहर हो गयीं तथा वर्तमान में किये जा रहे ऐसे प्रयास भी व्यर्थ हो जाएंगे तो यह है विमर्श का विषय कि ऐसा क्या किया जाए जिसको पीढियों तक विस्मृत ना कर पाएं। "अनियोजित कल्पनाशीलता से कल निर्मित इमारतें आज खंडहर हो गयीं तथा वर्तमान में किये जा रहे ऐसे प्रयास भी व्यर्थ हो जाएंगे।" यह पंक्ति हमें उस गूढ़ सच्चाई की ओर ले जाती है, जिसे अक्सर हम अनदेखा कर देते हैं – किसी रचना की दीर्घायु केवल उसकी भव्यता से नहीं, अपितु उसकी दूरदर्शिता और उद्देश्यपरकता से तय होती है। हमारे चारों ओर ऐसी अनेक रचनाएँ हैं – भौतिक और मानसिक – जो कभी अत्यंत नवाचार और उत्साह का प्रतीक थीं, परंतु आज केवल स्मृति शेष हैं। ये वे संरचनाएँ हैं जिन्हें योजना के बिना केवल कल्पना और तत्कालीन उत्साह के बल पर खड़ा किया गया। परंतु समय ने उन्हें प्रश्नचिह्न बना दिया। आज के युग में भी, जब तकनीक और संसाधनों की कोई कमी नहीं, हम फिर उसी राह पर अग्रसर हैं। स्वार्थपरक सोच, तात्कालिक प्रसिद्धि की लालसा और गहराई से विचार न करने की प्रवृत्ति हमें वही पुरानी भूलें दोहराने पर विवश कर रही...

विचार योग्य विषय

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भूमिका कल तक जब तक हम क्या हर कोई समाज में अपनी भूमिका समझता था और बुद्धिमानी इतनी कि समाज में निषिद्ध श्रेणी के विषयों को दरकिनार कर दिया जाता था। समय बदला और वर्जनाएं टूटीं तथा इंटरनेट के आगमन से निषिद्ध श्रेणी के समस्त विषयों पर खुले आम बात होने लगीं। तो लगा कि आज के समय में हमको सर्वाधिक सोचने समझने की जरूरत है। विवरण समाज में कुछ विषय ऐसे होते हैं जो संवेदनशील या बाद विवाद के लिए निषिद्ध माने जाते हैं। इन विषयों पर चर्चा करना विवादास्पद हो या ना हो लेकिन सामाजिक दृष्टि से आपत्तिजनक माना जाता रहा है और कई बार लोग इन मुद्दों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करते। तो फिर इस स्थिति में यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि सामाजिक दृष्टि से उचित कदम स्थिति को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाए जाएं ताकि चर्चा का सही दिशा में मार्गदर्शन हो सके और समाज में किसी भी प्रकार की नकारात्मकता या अनैतिकता की उत्पत्ति की संभावना से बचा जा सके।  समाज में चर्चा के विषय यदि अनैतिक प्रकृति के बहुतायत से होने पर भी यदि उदासीनता बनी रहे और कोई कार्रवाई नहीं की जाए, तो दो प्रमुख समस्याएं सामान्यतः उत्पन्न होती हैं।...